10 दिवसीय आंदोलन पर किसान:- पंजाब और मंदसौर में दूध से लेकर सब्जियों की सप्लाई तक पर रोक

10 दिवसीय आंदोलन पर किसान:- पंजाब और मंदसौर में दूध से लेकर  सब्जियों की सप्लाई तक पर रोक
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नई दिल्ली। मध्यप्रदेश और पंजाब सहित कई राज्यों के किसानों ने आज से आंदोलन शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसानों ने सब्जियों और दूध शहर से बाहर न भेजने का ऐलान किया है। बता दें कि किसान यूनियनों ने अपनी मांगों को लेकर केंद्र के खिलाफ 10 दिन के किसान आंदोलन की घोषणा की है।

किसानों की देशव्यापी आंदोलन के तहत कई संगठनों ने एक से दस जून तक सामान न बेचने का एलान किया है। इसके चलते लोगों को मुश्किल हो सकती है। हालांकि सभी संगठन आंदोलन में शामिल नहीं हैं।
वहीं देशव्यापी आंदोलन के चलते मध्य प्रदेश में सियासत तेज हो गई है। राज्य में पांच माह बाद विधानसभा के चुनाव हैं, लिहाजा भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए ही किसानों का यह आंदोलन बड़ा मुद्दा बन गया है। कांग्रेस ने चूंकि इस आंदोलन का समर्थन कर दिया है, लिहाजा भाजपा सरकार ने इससे निपटने के लिए खासे इंतजाम किए हैं। किसानों से बांड भरवाए गए हैं ।

गोलीकांड की पहली बरसी पर मंदसौर पहुंचेंगे राहुल गांधी

दरअसल 6 जून को मंदसौर गोलीकांड की पहली बरसी है। कांग्रेस ने इस मौके पर राहुल गांधी की सभा आयोजित की है। राहुल ने पिछले साल गोलीकांड के बाद भी मंदसौर पहुंचने की कोशिश की थी, पर कामयाब नहीं हो सके थे। लेकिन इस बार पार्टी ने बड़ा शो करने की तैयारी की है। उसे लग रहा है कि सूबे की सत्ता हासिल करने का रास्ता मंदसौर से होकर जाता है और किसानों का गुस्सा उसकी मुराद पूरी करने में अहम भूमिका निभा सकता है। लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा नहीं चाहती कि कांग्रेस को किसानों की कथित नाराजगी का चुनावी लाभ हो।

इसलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दो दिन पहले ही मंदसौर पहुंचकर किसानों से कहा, कांग्रेस खूनखराबा फैलाना चाहती है। मध्य प्रदेश शांति का टापू है, इसे बचा लो। कांग्रेस के इरादे को पहचानो। बहकावे में मत आओ। शिवराज का साथ दो। कहा कि मैंने किसानों की योजनाओं पर अब तक 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। आगे नुकसान हो तो चिंता न करना, मामा अभी जिंदा है।

पिछले साल मंदसौर गोलीकांड में छह किसानों की जान गई थी। सरकार ने इसकी जांच के लिए आयोग बैठाया, पर तीन बार कार्यकाल बढ़ाने के बावजूद अब तक रिपोर्ट का इंतजार है। 11 मई को कार्यकाल की अवधि बीत चुकी है। किसानों में इस बात का भी गुस्सा है कि एक साल होने को आया पर अब तक किसी की जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। जाहिर है, कांग्रेस इसे भी मुद्दा बना रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ कहते हैं कि भाजपा सरकार किसानों के साथ दुश्मनों जैसा बर्ताव कर रही है। वे अपना हक मांगते हैं तो उन्हें गोली दी जाती है। बुजुर्ग और भोले भाले किसानों का बांड भरवाकर सरकार खुद किसानों को भड़का रही है। अगर आंदोलन के दौरान कोई अप्रिय स्थिति बनती है तो इसके लिए शिवराज जिम्मेदार होंगे।

गौरत्लब है कि पिछले साल भी किसान संगठनों ने मध्य प्रदेश के मंदसौर में अपनी मांगों लेकर आंदोलन किया था। इस दौरान राज्य पुलिस की तरफ से की गई फायरिंग में पांच किसानों की मौत हो गई थी। इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए ग्रामों में सभाएं भी की गई थी।

UPDATES

-पंजाब के फरीदकोट में किसानों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। यहां किसान सड़कों पर सब्जियां फेंक कर विरोध जता रहे हैं।

-मंदसौर के किसानों ने बचे हुए दूध का इस्तेमाल मिठाई बनाने के लिए गांव वालों में वितरित करने का फैसला किया है. साथ ही यह मिठाई किसानों में ही बांटने की तैयारी है

इस दौरान किसानों से अनुरोध भी किया गया था कि वो ल, फूल, सब्जी और अनाज को बाजार में ना ले जाए। साथ ही कहा कि ना ही वो सामान शहरों से खरीदी करे और न गांवो में बिक्री करें।


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Future India News Network

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