रोज़ा इफ़्तार में दिखावा क्यों

रोज़ा इफ़्तार में दिखावा क्यों
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आजकल जहा देखिए वही पर इफ़्तार के दावत दिए जा रहे है…और तस्वीर खिंचावाकर सोशल मीडिया पर डाला जा रहा है।जो कि निहायत ही अफ़सोस की बात है।इसका मतलब क्या है दिखावा या सच में उस नबी के बताए हुए रास्ते पर चल रहे है।जो वर्षो पहले इफ़्तार के लिए सही मायने बताए।अगर उनके बताए हुए रास्ते पर चल रहे है तो ठीक है नही तो बस दिखावे के लिए इफ़्तार के दावत मत दीजिए।कभी किसी इफ़्तार के दावत में एक भी ग़रीब को इफ़्तार करते हुए देखा है।कभी भी नही तो फिर इफ़्तार के दावत किसके लिए दे रहे है।

उन रसूख़दार लोगो को जिनके पहले से ही पेट भरें पड़े है।लानत है ऐसे इफ़्तार का दावत देना,करना या कराना……जिसमे दिनभर के भूखे प्यासे को एक खजूर और एक बूंद पानी नसीब न हो और रसूखदारों के पेट भरा जाए और उनके तस्वीर खिंचवाकर सोशल मीडिया पर डाल कर वाह वाही बटोरे जाए…..अगर इतना ही शौक है इफ़्तार के दावत देने का तो शहर,गांव,कस्बे में जाइए और हर घरवाले से पूछिए की इफ़्तार के लिए सारी तैयारिया हो गई है।अगर एक भी घर से मुस्कान और दुआएँ भरे अल्फ़ाज़ से आपसे कहे कि हा इफ़्तार के सारी तैयारिया हो चुकी है तो उस वक़्त आपके इफ़्तार के दावत पूरी तरह मुक़म्मल होगी…..नही तो देते रहिए आपलोग इफ़्तार के दावत और आपके बगल में कोई बिना इफ़्तार किए ही पानी से रोज़ा तोड़े….आपके इफ़्तार के दावत देने से क्या फ़ायदा की आप जहा इफ़्तार के दावत दे रहे है वही पास में एक बूंद पानी के लिए दूसरा रोज़ेदार तड़पता रहे है और अपने दिल में सुकून रखे और हाथ ऊपर उठाकर दुआ करता रहे की देख तेरे बनाए हुए बन्दे किस तरह से रसूखदार लोगो को इफ़्तार के दावत दे रहे है और हम पास में ही भूखे प्यासे तड़प रहे है और उन्हें दिखाई नही दे रहे है।उस वक़्त वह नही तडपंगे बल्कि ख़ुद जो इफ़्तार के दावत दे रहे है वह तड़पेंगे…. और बारगाहे रिसालत में जब पकड़ होगी कि इतने लोगो तो इफ़्तार के दावत पर बुलाए…..लेकिन पास में ही भूखे गरीब को नही बुलाए तो उस वक़्त क्या ज़वाब देंगे….और जो कुछ भी दावत में खाने वाले चीज़े शामिल होगी वह तड़पेगी और लानत भेजी की दिखावे के लिए तुम जो इफ़्तार के दावत दिए हो वह कभी क़बूल नही होगी।जब तक हम इफ़्तार के दावत में गरीब और असहाय को शामिल नही करेंगे तब तक हमारे द्वारा दिया गया इफ़्तार के दावत सही मायने में कभी भी मुक़म्मल नही होंगे।

साभार-शौकत अली, टीवी पत्रकार है
ये उनके निज़ी विचार है


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Future India News Network

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