प्रणब ने आरएसएस को किया आगाह “असहिष्णुता और धार्मिक आधार पर देश को नहीं करें परिभाषित “

प्रणब ने आरएसएस को किया आगाह “असहिष्णुता और धार्मिक आधार पर देश को नहीं करें परिभाषित “
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आरएसएस के कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी ने कहा कि नफरत और असहिष्णुता से हमारी राष्ट्रीय पहचान खतरे में पड़ेगी. “जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि भारतीय राष्ट्रवाद में हर तरह की विविधता के लिए जगह है”.

नई दिल्लीः गुरुवार की शाम को स्वंय सेवक संघ के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संघ को राष्ट्रवाद की पाठ पढ़ाया। हालांकि उन्होने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बोलेंगे। यही तीनों ही मसलों पर प्रणब मुखर्जी ने स्पष्ट रुप से अपनी बातें कही, उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रवाद का प्रवाह संविधान से होता है. ‘‘भारत की आत्मा बहुलतावाद और सहिष्णुता में बसती है.’’ प्रणब मुखर्जी ने आरएसएस को आगाह करते हुए कहा कि धार्मिक और असहिष्णुता के माध्यम से भारत को परिभाषित करने का प्रयास देश की असमिता और अस्तित्व को कमजोर करता है। भाषण में प्रणब ने भाषण के दौरान पंड़ित जवाहर लाल नहरु और महात्मा गांधी का भी जिक्र किया।
कार्यक्रम के भाषण से खुश कांग्रेस ने कहा कि उन्होंने संघ को ‘सच का आईना‘ दिखाया और नरेंद्र मोदी सरकार को ‘राजधर्म‘ की याद दिलाई. आपको बता दें की प्रणब मुखर्जी के आरएसएस के कार्यक्रम में जाने के फैसले पर बयान देने से कांग्रेस बचती नजर आ रही थी. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘पूर्व राष्ट्रपति का आरएसएस मुख्यालय का दौरा बड़ी चर्चा का विषय बन गया था. देश की विविधता और बहुलता में विश्वास करने वाले चिंता व्यक्त कर रहे थे. लेकिन आज मुखर्जी ने आरएसएस को सच का आईना दिखाया.‘‘
उन्होंने कहा, ‘‘मुखर्जी ने नागपुर में आरएसएस मुख्यालय में आरएसएस को सच का आईना दिखाया है. उनको बहुलवाद, सहिष्णुता, धर्मनिरपेक्षता और समग्रता के बारे में पाठ पढ़ाया है.‘‘ वहीं प्रणब मुखर्जी की बेटी और कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने आरएसएस पर फेक न्यूज को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि कहा कि उन्हें जिस बात का डर था वही हुआ.

‘हम सभी भारत माता की संतानें हैं‘
पूर्व राष्ट्रपति के संबोधन से पहले संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस के कार्यक्रम में मुखर्जी के भाग लेने को लेकर छिड़ी बहस ‘ निरर्थक ’ है और उनके संगठन में कोई भी व्यक्ति बाहरी नहीं है. भागवत ने कहा कि इस कार्यक्रम के बाद भी मुखर्जी वही रहेंगे जो वह हैं और संघ वही रहेगा जो वह है. उन्होंने कहा कि उनका संगठन पूरे समाज को एकजुट करना चाहता है और उसके लिए कोई बाहरी नहीं है. उन्होंने कहा कि लोगों के भिन्न मत हो सकते हैं लेकिन सभी भारत माता की संतानें हैं.

आज हिंसा का स्तर बढ़ रहा है
प्रणब मुखर्जी ने कहा, ‘‘प्रति दिन हम अपने आसपास बढ़ी हुई हिंसा देखते हैं. इस हिंसा के मूल में भय , अविश्वास और अंधकार है.’’पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि हमें अपने सार्वजनिक विमर्श को हिंसा से मुक्त करना होगा. साथ ही उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में हमें शांति , सौहार्द्र और प्रसन्नता की ओर बढ़ना होगा. मुखर्जी ने कहा कि हमारे राष्ट्र को धर्म , हठधर्मिता या असहिष्णुता के माध्यम से परिभाषित करने का कोई भी प्रयास केवल हमारे अस्तित्व को ही कमजोर करेगा. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे मुखर्जी ने संघ के स्वयंसेवकों के ट्रेनिंग के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात नागपुर के रेशमबाग में स्थित आरएसएस मुख्यालय में कही.

अपने भाषण में नेहरू को भी याद किया मुखर्जी ने
उन्होंने नेहरू की किताब डिस्कवरी ऑफ इंडिया का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘नफरत और असहिष्णुता से हमारी राष्ट्रीय पहचान खतरे में पड़ेगी. जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि भारतीय राष्ट्रवाद में हर तरह की विविधता के लिए जगह है. भारत के राष्ट्रवाद में सारे लोग समाहित हैं. इसमें जाति, मजहब, नस्ल और भाषा के आधार पर कोई भेद नहीं है.‘‘
उन्होंने प्राचीन भारत से लेकर देश के स्वतंत्रता आंदोलत तक के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा राष्ट्रवाद ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘ सर्वे भवन्तु सुखिन :..’ जैसे विचारों पर आधारित है. मुखर्जी ने राष्ट्र की अवधारणा को लेकर सुरेन्द्र नाथ बनर्जी और बालगंगाधर तिलक के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा राष्ट्रवाद किसी क्षेत्र , भाषा या धर्म विशेष के साथ बंधा हुआ नहीं है. उन्होंने कहा कि हमारे लिए लोकतंत्र सबसे महत्वपूर्ण मार्गदशर्क है.

क्या मुखर्जी के भाषण से खुश हुआ संघ ?
आरएसएस ने संघ मुख्यालय में मुखर्जी के भाषण पर कहा कि उन्होंने देश के गौरवशाली इतिहास की याद दिलायी और उन्होंने समावेशी, बहुलतावाद और विविधता में एकता को ‘भारत की आत्मा’ बताया. आरएसएस प्रवक्ता अरुण कुमार ने कहा कि मुखर्जी के भाषण ने राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास की याद दिलायी … देश की 5,000 साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत की याद दिलायी. हमारी राज्य प्रणाली भले ही बदल सकती है लेकिन हमारे मूल्य वही रहेंगे.


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