क्या कांग्रेस से हाथ मिलायेंगी मेहबूबा मुफ्ती?

क्या कांग्रेस से हाथ मिलायेंगी मेहबूबा मुफ्ती?
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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में सियासी पारा एक बार फिर चढ़ने लगा है।सूत्रों के मुताबिक पीडीपी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के पास मिलकर सरकार बनाने की पहल की है। इसके लिए सोमवार को नई दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई में कांग्रेस पार्टी ने जम्मू कश्मीर के नेताओं के संग बैठक की ।

बैठक के बाद कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने कहा कि हमारी मांग है कि राज्य में जल्द से जल्द चुनाव हो। खबर है कि बैठक में करीब 100 नेताओं को बुलाया गया था। जिसमें सांसद, विधायक, पूर्व सांसद और पूर्व विधायक सहित अन्य नेता शामिल हुए। कांग्रेस की प्लानिंग ग्रुप की बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, राज्य के लिए पार्टी प्रभारी अम्बिका सोनी, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद भी शामिल हुए।

बता दें कि जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती आज दिल्ली में ही हैं। माना जा रहा है कि आज उनकी मुलाकात यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी से हो सकती है। वहीं इसके अलावा मंगलवार को कांग्रेस विधायकों की श्रीनगर में बैठक भी होने वाली है, जिसमें राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा होगी।

राज्य में सरकार बनाने के लिए 44 विधायकों की जरूरत है। पीडीपी के पास 28 विधायक हैं जबकि कांग्रेस के पास 12 विधायक हैं। हालांकि इसके बाद भी दोनों पार्टियों को राज्य में सरकार बनाने के लिए 4 विधायकों की ज़रूरत होगी। कांग्रेस का मानना है कि 3 निर्दलीय विधायक और 1-1 सीपीआईएम-जेकेडीऍफ के विधायक है, जो सरकार बनाने के पक्ष में हैं। उन्हें भरोसा है कि ये विधायक सरकार बनाने में उनकी मदद करेंगे।

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद से अभी राज्य में राज्यपाल शासन लागू है।

गौरतलब है कि कांग्रेस ने अगर पीडीपी के साथ हाथ मिलाने का फैसला किया तो ये फारूक अब्दुल्ला-उमर अब्दुल्ला को नागवार गुजरेगा और कांग्रेस अपनी पुरानी सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस को किसी सूरत में नाराज नहीं करना चाहती। घाटी में पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस परंपरागत सियासी विरोधी है। आज के हालात में नेशनल कान्फ्रेंस का पलड़ा भारी लगता है। दूसरी तरफ कांग्रेस हमेशा पीडीपी को बीजेपी से हाथ मिलाने के लिए कोसते रहने के साथ-साथ कश्मीर में हालात खराब करने के लिए भी जिम्मेदार ठहराती रही है।

ऐसे हालात में बीजेपी से अलग होते ही पीडीपी के साथ सरकार बनाना कांग्रेस के लिए उलटा भी पड़ सकता है। राज्य में पीडीपी के साथ सरकार बनाने के प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस उलझन में हैं और हर नफा-नुकसान को तौल रही है।


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Tabina Ofaque

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