दूसरा दिन: सड़क पर बहाया दूध, फेंके टमाटर, देश भर में गांव बंद

दूसरा दिन: सड़क पर बहाया दूध, फेंके टमाटर, देश भर में गांव बंद
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नई दिल्‍ली । कर्ज माफी, फसलों का सही दाम एवं अन्य मांगों को लेकर किसानों की राष्ट्रव्यापी 10 दिवसीय महाहड़ताल का आज दूसरा दिन है। आंदोलन का असर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में देखने को मिला। पहले दिन कई जगह किसानों ने सड़क पर दूध बहाकर और टमाटर फेंक कर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने ऐलान किया था कि वे एक जून से दस जून तक शहरों को दूध, सब्जी और अनाज की आपूर्ति रोक देंगे। बंद के पहले ही दिन कई क्षेत्रों में सब्ज़ियों और दूध के दामों में बढ़त दर्ज की गई।हालांकि थोड़ी- बहुत हिंसा के आलावा किसानो का देशव्यापी आंदोलन पहले दिन शांतिपूर्वक रहा।

यूपी के कई शहरों में किसान सड़क पर उतर आए। संभल में किसानों ने दूध बहाया और टमाटर फेंका। मुरादाबाद में भारतीय किसान यूनियन ने बिलारी के खनुपुरा में दूध और सब्जियों की आपूर्ति रोक दी। किसान आंदोलन के पहले दिन इंदौर में फल-सब्जियों की आवक कम हो गई। लेकिन सब्जियों के पर्याप्त खरीदारों के थोक मंडी नहीं पहुंचने पर इनके भाव आधे रह गए। झाबुआ में धारा 144 लगा दी गई है। साथ ही प्रशासन ने किसानों से शांति बनाए रखने की अपील की है। मध्यप्रदेश में 1 जून से 10 जून तक प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है। पंजाब में किसानों ने सब्जियों के ट्रकों का चक्का जाम कर दिया। लुधियाना और माछीवाड़ा में किसानों ने दूध की सप्लाई नहीं होने दी और जो भी दूध लेकर जा रहा था उसकी गाड़ी को रोक कर दूध सड़कों पर बहा दिया। हरियाणा के फतेहाबाद में किसानों ने बीच रास्ते में एक व्यापारी को रोक कर उसकी सब्जियाँ सड़क पर फेंक दी । वहीं जींद में भी भारतीय किसान यूनियन ने एलान किया कि शहर में दूध और सब्जी की सप्लाई नहीं होगी। पुणे के खेडशिवापुर टोल प्लाजा पर किसानों ने 40 हजार लीटर दूध बहा कर विरोध जताया। महाराष्ट्र के कई और शहरों में भी आंदोलन का असर देखने को मिला।

गौरतलब है कि पिछले साल 6 जून को मंदसौर में किसान आंदोलन के दौरान 6 लोगों के मारे जाने की घटना के एक साल पूरा होने पर देशभर में बुधवार से शुरू होकर 10 दिन के लिए किसान आंदोलन किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि एक साल में किसानों के हालात नहीं सुधरे हैं और वे एक बार फिर कर्जमाफी, उत्पाद की बढ़ी कीमत और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की मांग लेकर सड़कों पर हैं। यही नहीं, अपनी बात सुनवाने के लिए किसान उन्हीं उत्पादों को सड़कों पर फेंक रहे है जिन्हें कई महीनों की मेहनत के बाद उन्होंने पैदा किया था।

इस बीच संगठन के संयोजक शिवकुमार शर्मा ‘कक्का’ ने दावा किया कि सभी किसान संगठन लामबंद हैं। मध्यप्रदेश सहित देश के 22 राज्यों में देशव्यापी ‘गांव बंद आंदोलन’ से शुरू हो गया है। इस आंदोलन के अंतिम दिन 10 जून को ‘भारत बंद’ का आह्वान पूरे देश के किसान संगठनों द्वारा किया जाएगा। उन्‍होंने हड़ताल पर माफी मांगते हुए लोगों से कहा कि सोचिए यदि किसान फसल उगाना बंद कर देगा तो क्‍या होगा। वहीं, भारतीय किसान यूनियन ने कहा कि सरकार हमारी तीन मांगें (कर्जमाफी, लाभकारी मूल्य और किसान पर दर्ज प्रकरण की वापसी) मान लेती है तो हम आंदोलन समाप्त करने को भी तैयार हैं। छह जून को गांव-गांव में दीपक जलाकर मंदसौर गोलीकांड के मृतकों को श्रृद्धांजलि दी जाएगी। 10 जून के बाद मंडी बंद आंदोलन करेंगे।

वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किसान आंदोलन को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि किसानों का ऐसा कोई मुद्दा है ही नहीं और वे बेकार की चीजों पर ध्यान लगाकर अपना ही नुकसान कर रहे हैं। खट्टर ने कहा, ‘हड़ताल तो कोई मुद्दा ही नहीं है। वे जो दूध और सब्जियां सड़क पर फेंक रहे हैं, बेचने से इनकार कर रहे हैं, इससे उन्हीं का नुकसान होना है। वे बेकार की चीजों में ध्यान लगाकर प्रदर्शन कर रहे हैं।’

मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री बालकृष्ण पाटीदार ने भी मुद्दे को ख़ारिज करते हुए कहा कि कोई किसान आंदोलन में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा,” आज दो जून है और कही आंदोलन नहीं दिख रहा है। कोई किसान आंदोलन में शामिल नहीं है। सरकार की स्कीम में किसान खुश हैं और उन्हें राज्य और केंद की सरकार पर भरोसा है। ”

दूसरी तरफ पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू किसान आंदोलन के समर्थन में आ गए हैं। पूर्व क्रिकेटर सिद्धू फतेहगढ़ साहिब के एक गांव में पहुंचे और गांव में किसान से सब्जियां और दूध खरीदा। इस दौरान नवजोत सिंह सिद्धू ने सब्जियों और दूध के लिए दो हाजर रुपए का भुगतान भी किया।

source- Hindustan हिंदी, नवभारत टाइम्स, @ANI

image-दैनिक जागरण


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Tabina Ofaque

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