अक़्लमंदों का एक गांव था- परवेज़ अहमद

अक़्लमंदों का एक गांव था- परवेज़ अहमद
Please Share On....

अक़्लमंदों का एक गांव था। वहां सूखा पड़ गया।बारिश होने में छह महीने बाक़ी थे लेकिन गांववालों के पास केवल तीन महीने के लायक़ खाने पीने का सामान बचा था।समस्या यह थी कि तीन महीने के सामान के सहारे छह महीने कैसे गुज़ारे जाएं ?

गांव अक़्लमंदों का था तो ज़ाहिर है पांचों पंच और सरपंच भी काफ़ी अक़्लमंद थे।समस्या को सुलझाने के लिए पंचायत बुलाई गई और लोगों से सुझाव मांगे गए।

पहला सुझाव आया कि तीन महीने के खाने को बचा बचाकर, खाया जाए और छह महीनों तक खींचा जाए। लेकिन यह सुझाव रद्द हो गया।

दूसरा सुझाव आया कि पहले तीन महीने ठीक से खा पी कर गुज़ारे जाएं। हो सकता है बारिश जल्दी हो जाए, कहीं से मदद मिल जाए।सब कुछ ठीक हो जाए। यह सुझाव भी रद्द हो गया।

फिर सरपंच साहब की तरफ़ से सुझाव आया कि अच्छा हो कि हम सब पहले तीन महीने भोखे रह लेते हैं।तीन महीने जैसे तेसे गुज़र जाएंगे। उसके बाद बाक़ी के तीन महीने पेट भरकर खाएंगे। फिर बारिश होगी, नई फ़सल आएगी। खेतों में, बाग़ों में बहार होगी। सभी लोगों के चेहरे चमक उठे।क्योंकि प्रस्ताव सरपंच साहब की ओर से आया था इस्लिए उसे ध्वनि मत से स्वीकार कर लिया गया।
यह तय कर लिया गया कि अगले दिन से, अगले तीन महीने तक, गांव का का कोई भी व्यक्ति कुछ भी खाएगा पिएगा नहीं।

पंद्रह बीस दिन बाद से अक़्लमंदों के उस गांव में गिद्धों, क़बर बिज्जुओं और नरभक्षियों का साम्रराज्य फैलना शुरू हो गया।

अक़्लमंदों का एक गांव था। वहां सूखा पड़ गया।बारिश होने में छह महीने बाक़ी थे लेकिन गांववालों के पास केवल तीन महीने के लायक़ खाने पीने का सामान बचा था।समस्या यह थी कि तीन महीने के सामान के सहारे छह महीने कैसे गुज़ारे जाएं ?

गांव अक़्लमंदों का था तो ज़ाहिर है पांचों पंच और सरपंच भी काफ़ी अक़्लमंद थे।समस्या को सुलझाने के लिए पंचायत बुलाई गई और लोगों से सुझाव मांगे गए।

पहला सुझाव आया कि तीन महीने के खाने को बचा बचाकर, खाया जाए और छह महीनों तक खींचा जाए। लेकिन यह सुझाव रद्द हो गया।

दूसरा सुझाव आया कि पहले तीन महीने ठीक से खा पी कर गुज़ारे जाएं। हो सकता है बारिश जल्दी हो जाए, कहीं से मदद मिल जाए।सब कुछ ठीक हो जाए। यह सुझाव भी रद्द हो गया।

फिर सरपंच साहब की तरफ़ से सुझाव आया कि अच्छा हो कि हम सब पहले तीन महीने भोखे रह लेते हैं।तीन महीने जैसे तेसे गुज़र जाएंगे। उसके बाद बाक़ी के तीन महीने पेट भरकर खाएंगे। फिर बारिश होगी, नई फ़सल आएगी। खेतों में, बाग़ों में बहार होगी। सभी लोगों के चेहरे चमक उठे।क्योंकि प्रस्ताव सरपंच साहब की ओर से आया था इस्लिए उसे ध्वनि मत से स्वीकार कर लिया गया।
यह तय कर लिया गया कि अगले दिन से, अगले तीन महीने तक, गांव का का कोई भी व्यक्ति कुछ भी खाएगा पिएगा नहीं।

पंद्रह बीस दिन बाद से अक़्लमंदों के उस गांव में गिद्धों, क़बर बिज्जुओं और नरभक्षियों का साम्रराज्य फैलना शुरू हो गया।

साभार – परवेज़ अहमद,वरिष्ठ पत्रकार
ये उनके निजी विचार है ।


Please Share On....

Future India News Network

The author didn't add any Information to his profile yet.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked. *